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Mistakes are proof you are trying.


मेरी K2K यात्रा साइकिल से 0.7

K2K यात्रा से 1 दिन पहले 

kashmir to Kanyakumari by cycle
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     4 नवंबर 2019 सुबह 8:00 बजे, मैं इस समय कटरा में हूंँ। Video Link यहाँ से हिंदू धार्मिक श्रद्धालु वैष्णो देवी की यात्रा शुरू करते हैं। पर मेरा वैष्णो देवी जाने का कोई इरादा नहीं है, क्योंकि मेरा मानना है कि आप मोबाइल टावर के आसपास रहोगे, तब भी आपको नेटवर्क मिलेगा। आपको मोबाइल टावर के बिल्कुल नीचे जाने की जरूरत नहीं है। मोबाइल टावर के दिखने से ना तो मोबाइल के सिगनल बढ़ जाते हैं और ना दिखने से ना वो सिगनल कम होते हैं। तो जो भी यहाँ पर शक्ति है, सकारात्मक शक्ति है, उसका आशीर्वाद, उसका सहारा, मेरे साथ है। तभी मैं यहाँ तक पहुँचा हूँ। उसके लिए मुझे बिल्कुल उसके करीब जाने की या देखने कि जरूरत नहीं है और एक वक्त पर एक काम किया जाए तभी वह बेहतर तरीके से होता है और इस समय मेरा उद्देश्य कश्मीर से कन्याकुमारी पहुंचना ,है साइकिल से। ना कि धार्मिक यात्राओं को करना। जब धार्मिक यात्रा करूंगा तो सिर्फ धार्मिक यात्रा करूंगा । इसलिए मै कश्मीर के श्रीनगर लाल चौक जाने की तैयारी करने लगा। मैंने पहले ही गूगल मैप का सहारा लेकर के और कुछ यूट्यूब पर वीडियो देख कर के श्रीनगर से जयपुर तक का रूट बनाया हुआ था, कि मुझे किस रास्ते से, कैसे कैसे जाना है। कुछ दिन पहले से ही मैं श्रीनगर से जुड़ी हुई ख़बरों पर ध्यान से नजर रखे हुए था।

kashmir to Kanyakumari by cycle
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     क्योंकि कश्मीर के हालात ठीक नहीं थे। कुछ समय पहले (5 अगस्त 2019) ही धारा 370 वहाँ से भारत सरकार ने हटाई थी। खबरों की मानें तो वहाँ के स्थानीय लोग बाहरी लोगों से नाराज थे। विरोध कर रहे थे। कुछ दिन पहले ही पर्यटकों को वहाँ जाने की इज़ाजत सरकार ने दी। उससे पहले पर्यटकों का कश्मीर जाना बंद था। लगभग तीन चार महीने से कश्मीर के अंदर इंटरनेट और मोबाइल सेवा, फोन सब बंद चल रहे थे। कुछ दिन पहले ही सरकार ने सिर्फ SMS सेवा और पोस्टपेड मोबाइल को चालू किया था। पर मेरे दोनों मोबाइल प्रीपेड थे। जिसकी वजह से कटरा पहुँचते ही मेरा बाहरी दुनिया से संपर्क कट गया। पठानकोट के बाद जम्मू कश्मीर राज्य में एंटर करते ही मोबाइल काम करना बंद कर दिए थे। लखनपुर, जम्मू कश्मीर और पंजाब का बॉर्डर है। तो जैसे ही बस ने लखनपुर को क्रॉस किया और जम्मू-कश्मीर में प्रवेश किया तभी से ही मेरे मोबाइल काम करना बंद कर दिए थे। समाचार खबरों के हिसाब से मुझे मालूम था कि एक-एक करके पिछले कुछ दिनों में 5 बाहरी ट्रक ड्राइवरों को कश्मीर में मारा गया, कुछ सेब व्यापारियों को जो बाहर के राज्यों के थे, उनको भी मारा गया। तो इसलिए मैं ज्यादा सतर्क था। तो मैंने वहाँ के लोकल लोगों से इस बारे में बात करनी शुरू करी, कि मुझे श्रीनगर लाल चौक से अपनी यात्रा शुरू करनी है अकेले, तो कितना सुरक्षित रहेगा! कुछ मैंने आर्मी वालों से भी बात करी, जो वहाँ पर सिक्योरिटी पर थे। बहुत सारे लोगों से मैंने बात करना शुरू किया और धीरे-धीरे 4 नवंबर 2019 को ही कटरा से उधमपुर की तरफ मै चलता रहा साइकिल से।

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      किसी ने बताया कि उधमपुर पर हाईवे है, वहाँ से आपको जीप मिल जाएगी। आप अपनी साइकिल रखकर श्रीनगर जा सकते हैं। आज ही मुझे ये खबर मालूम पड़ती कि श्रीनगर लाल चौक पर ग्रेनेड ब्लास्ट हुआ है। जिसमें लगभग 35 लोग घायल हुए हैं और एक की मौत हुई है। तो मैं और ज्यादा सतर्क हो गया। सच कहूँ तो थोड़ा डर भी गया और मैंने और ज्यादा सुरक्षाकर्मियों से बात करनी शुरू करी और लोकल लोगों से बात करनी शुरू करी कि मुझे लाल चौक श्रीनगर से अकेले साइकिल लेकर आना है तो क्या यह सुरक्षित रहेगा ?
     पर सभी लोकल लोगों का, आर्मी वालों का, पुलिस वालों का जिन से मैंने बात करी, सबकी एक ही राय थी कि मुझे वहाँ नहीं जाना चाहिए। माहौल सुरक्षित नहीं है और कुछ लोगों ने कहा, अगर आपको जाना ही है तो आप हिंदुस्तान का तिरंगा हटाकर, साइकिल के ऊपर लगे हुए दोनों बोर्ड आगे पीछे जो बोर्ड लगाए है, आपने वह हटाकर, रिफ्लेक्टिंग जैकेट और हेलमेट उतार कर नॉर्मल तरीके से साईकिल यात्री की तरह जाए, तो आप सुरक्षित रह सकते है पर मैंने उनसे कहा कि इससे तो मेरी यात्रा का उद्देश्य पूरा नहीं होगा। मेरा उद्देश्य ही लोगों से मिलना, उनसे बात करना है। पर्यावरण के लिए वह क्या सोचते हैं और उन्हें पर्यावरण के लिए जागरूक करना उन्हें कुछ सिखाना और उनसे बहुत कुछ सीखना। पर अगर मैं इस तरीके से चुपचाप जाऊंगा श्रीनगर और वहाँ से चुपचाप आऊँगा तो कोई फायदा ही नहीं है. इससे मेरा मकसद पूरा नहीं हो रहा था। इस लिए मैंने फैसला लिया कि मैं श्रीनगर नहीं जाऊँगा क्योंकि मुझे जिंदा रहना था। सुरक्षित यात्रा पूरी करके, अपने घर पहुंचना था, अपने परिवार के पास। इसलिए मैंने हीरो बनने की कोशिश नहीं की। कश्मीर के लोग क्या सोचते हैं 370 के बारे में या पूरे हिंदुस्तान के बारे में यह मैं आगे बताऊँगा। जब इससे जुड़े हुए सवाल इस यात्रा के दौरान आएंगे।
 
     उधमपुर से ही 4 नवंबर 2019 को मैं वापस कटरा आ गया और कटरा में मैंने 350 रूपये का एक गेस्ट हाउस लिया और वहाँ रात रुका। पैसे बहुत ही कम थे और पैसों के बारे में मैं आगे अलग से बताऊंगा कि कितने पैसे थे। वह पैसे कहाँ खर्च हुए। यह यात्रा मैंने कैसे बिना पैसों के करी। उन सब के बारे में आगे बताऊँगा। मैंने फैसला लिया था कि मैं अपने खाने पर एक वक्त में 50 रूपये से ज्यादा खर्च नहीं करूंगा। तो मैंने कटरा का जो चौक है, वहाँ पर छोटी सी मार्केट है, जहाँ पर खाने की रेडीया लगती है। वहाँ पर 50 रूपये में आपको भरपेट खाना मिलता है। रोटी, सब्जी, दाल, चावल इत्यादि। मैं अपनी इस किताब में हर विषय के साथ उसकी जुड़ी हुई तस्वीरें भी लगा रहा हूं ताकि आप को इस यात्रा को महसूस करने में आसानी हो।
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Video Link : Memories of journey
आज की रात मेरे लिए कयामत की रात थी। जैसे इंग्लिश में कहते हैं “इट्स फाइनल काउंटडाउन” क्योंकि अब मैंने सुबह यहाँ से अपनी यात्रा शुरू करनी थी। मतलब 5 नवंबर 2019 को। मुझे बहुत ही अजीब महसूस हो रहा था। मै साइकिल को बार बार चेक कर रहा था। बार-बार समान को चेक कर रहा था। टायर चेक कर रहा था। अपने आप मे सोच रहा था कि अब मैं यहाँ से जब अपनी यात्रा शुरू करूंगा, तो कटरा से जम्मू तक की जो खड़ी ढलान है वो कैसे पार होगी। कई हादसे वहाँ पर हो चुके है, होते रहते हैं। यह सब दिमाग में चल रहा था। घरवालों से बात करने के लिए मैंने पीसीओ का सहारा लिया। एसटीडी, पीसीओ तो आपको याद होगा । कश्मीर में इंटरनेट और फोन बंद होने की वजह से जगह-जगह लोगों ने अपने फोन पर एसटीडी पीसीओ के बोर्ड लगा कर के रखे हुए थे। टेबल पर बाहर 5 रूपये मिनट के हिसाब से मुझे 90 के दशक की याद आ गई। जब लोग एसटीडी – पीसीओ से ही फोन किया करते थे। मोबाइल नहीं होते थे और शाम को 7:00 बजे के बाद एसटीडी करते थे ताकि हॉफ रेट लगे और 11:00 बजे के बाद चौथाई रेट लगते थे। तो वह जमाना याद आ गया। जब वहाँ पर जगह-जगह पीसीओ के बोर्ड लगे हुए देखें। तो मैंने वहाँ से शाम को घर पर बात कर ली थी। घर पर उससे पहले भी एक बार दोपहर को बात करी थी और एक बार अभी रात को बात करी है। उन्हें पता है कि मैं सुबह निकलूंगा और अब उन्हें मैं तभी कांटेक्ट कर पाऊंगा। जब मैं लखनपुर का बॉर्डर क्रॉस करके पंजाब मे प्रवेश करूंगा। पता नहीं रास्ते में एसटीडी – पीसीओ मिले ना मिले। अब सुबह का इंतजार था। अब आगे मैं यात्रा को दिनों के हिसाब से बताता रहूंगा। यात्रा से पहले की तकरीबन सभी बातें मैं लिख चुका हूं। अगर कुछ छूट गया हो और जो मुझे आगे लिखते समय याद आएगा तो उसका जिक्र में आगे करता रहूंगा। अब मेरी साइकिल यात्रा शुरू होने जा रही है।
अब मैं आगे अपनी साइकल यात्रा को हर दिन के हिसाब से आपको बताऊंगा। उससे पहले मैं एक चीज और बताना चाहूंगा कि इस यात्रा को शुरू करने का उद्देश्य क्या है ? और दूसरी बात यह बताना चाहूंगा कि किन परिस्थितियों में या किस वजह से मेरा हृदय परिवर्तन हुआ और मैंने यह यात्रा करने का, साइकल यात्री बनने का फैसला क्यो किया और पहले क्यों नहीं किया अपने जीवन में।

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