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Kumbh Mela 2021 कुम्भ के बारे मे जाने कुछ महत्वपूर्ण बातें जो आपको नहीं थी पता


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Kumbh Mela or Kumbha mela 2021

कुम्भ मेला या कुम्भा मेला 


कुम्भ मेला  भारत में  चार जगहों पर लगता है ।

● प्रयागराज  (इलाहाबाद)  मे  गंगा, यमुना और सरस्वती (संगम) किनारे
● हरीद्वार गंगा नदी के किनारे (2021)
● उज्जैन शिप्रा नदी के किनारे 
● नासिक गोदावरी नदी के किनारे 

kumbh mela 2021Image by Rajesh Balouria from Pixabay


कुंभ मेला हर तीन साल बाद लगता है। इस लिये हर जगह का नम्बर बारह साल बाद आता है ।


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क्यों मनाया जाता है कुंभ मेला ?

     जैसा कि हमारे शास्त्रो में वर्णित है कि समुद्र मंथन के बाद उसमे से जो विष निकला था वो तो भगवान शिव ने पी लिया था । उस विष के पीने से उनका गला नीला पड़ गया था । जिस वजह से उन्हें नील कण्ठ  भी कहते हैंं । और जो अमृत था  उसको लेकर देवताओं और दानवों के बीच में युद्ध होने लगा। उस अमृत कलश में से अमृत छलका और कहा जाता है कि वह अमृत धरती पर चार जगहों पर गिरा । उन्हीं चार जगहों पर आज कुम्भ मेला लगाया जाता है ।


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कैसे होती है कुम्भ मेले की गणना , कब लगेगा ?

कुंभ मेला कब लगेगा इसका पता लगाने के लिए जो गणना की जाती है उस में मुख्य रूप से हम अपने नौ ग्रहों में से तीन ग्रहों को मुख्य रूप से लेते है। वह ग्रह है  :-
सूर्य (SUN), बृहस्पति (JUPITER) or (गुरु), चंद्र (MOON)

इन ग्रहों की गोचर में स्थिति देखकर यह पता लगाया जाता है कि अगली बार का कुंभ किस स्थान पर लगेगा।

     दोस्तों जो हमारा बृहस्पति ग्रह है जिसे हम गुरु भी कहते हैं वह एक राशि में लगभग 1 वर्ष रहता है। जैसा कि हम जानते हैं कि हमारी भारतीय ज्योतिष प्रणाली में 12 राशियों का वर्णन है। तो बृहस्पति ग्रह पूरी 12 राशियों को पार करने में मतलब अन्तरिक्ष मे 360-degree के भचक्र (ZODIAC) का चक्कर लगाने में वह 12 वर्ष लेता है। इसी आधार पर हर एक जगह जहां पर कुंभ लगता है उसका दोबारा नंबर 12 वर्ष बाद आता है।

  1. जब सूर्य मकर राशि में और बृहस्पति मेष राशि में प्रवेश करते हैं तो कुंभ मेला प्रयागराज में आयोजित होता है।
  2. जब सूर्य और बृहस्पति सिंह राशि में प्रवेश करते हैं तब उस वर्ष कुंभ मेला महाराष्ट्र के नासिक में गोदावरी नदी के तट पर लगता है।
  3. जिस वर्ष बृहस्पति सिंह राशि में तथा सूर्य मेष राशि में हो उस वर्ष कुंभ मेला उज्जैन में आयोजित होता है शिप्रा नदी के तट पर
  4. जिस वर्ष बृहस्पति कुंभ राशि में तथा सूर्य मेष राशि में प्रवेश करें उस वर्ष में कुंभ मेला हरिद्वार में आयोजित होता है जैसा कि इस वर्ष 2021 में हो रहा है।

kumbh mela 2021Image by T Sundup from Pixabay



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     कुंभ मेले में स्नान करने का बड़ा ही गहरा महत्व है और इसमें स्नान करने के लिए देश-विदेश से लाखों लोग आते हैं। जिसमें कि पूरे भारतवर्ष से लाखों ही नहीं बल्कि करोड़ों की संख्या में लोग कुंभ मेले में स्नान करते हैं।
     जिसमें सबसे प्रथम मौका अखाड़ों को दिया जाता है जो सन्यासी होते हैं, नागा साधु होते हैं, उनके अपने अखाड़े होते हैं और अखाड़ों में भी इस बात को लेकर प्रतिस्पर्धा होती है कि कौन पहले स्नान करेगा। कई बार उनमे इस बात को लेकर वाद विवाद काफी बढ़ भी जाता है।

कुम्भ मेला सामान्य तौर पर 48 दिन चलता है।

     परंतु करोना के मद्देनजर इस वर्ष उत्तराखंड सरकार ने साधु संतों से बात कर के इसकी अवधि को कम किया है जिसकी वजह से यह 28 दिन की अवधि लगभग रह गई है। 1 अप्रैल 2021 में कुंभ का आयोजन होगा उत्तराखंड के हरिद्वार में गंगा नदी के किनारे होगा ।


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CORONA
करोना का कुंभ मेले पर असर 

     दोस्तों वर्ष 2021 में कुंभ मेले का आयोजन हरिद्वार में गंगा नदी के तट पर किया जा रहा है। जैसा कि आप जानते हैं इस वर्ष बृहस्पति ग्रह कुंभ राशि में तथा सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करते ही कुंभ मेले का आयोजन होता है।

      2021 मे  कुंभ मेला हरिद्वार में आयोजित गंगा नदी के तट पर हो रहा है। परंतु सबसे बड़ी समस्या इस बात की है कि पिछले वर्ष 2020 में करोना ने अपना तांडव पूरी दुनिया में दिखाया। पूरी दुनिया में लॉकडाउन हुआ। भारत में भी कई महीनों लॉकडाउन  चला। उसके बाद धीरे धीरे करोना के केस कम होने लगे। कोविड-19 का असर कम होने लगा। परंतु अचानक 2021 में मार्च में करोना के केस वापस बढ़ने लगे है। बहुत सारे लोग करोना से गंभीर तरीके से बीमार हो रहे हैं।


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    अब कुछ दिनों बाद ही हरिद्वार पर कुंभ मेले का आयोजन होना है और लाखों करोड़ों की संख्या में वहां पर श्रद्धालुओं ने पहुंचना है स्नान करने के लिए क्योंकि भारत एक भावुक देश है तथा धार्मिक देश है तो इस वजह से लोग करोना के असर को गंभीरता से ना लेते हुए अपनी धार्मिक गंभीरता दिखाते हुए कुंभ स्नान के लिए हरिद्वार में जुटना शुरू हो गए हैं। लाखों की तादाद में श्रद्धालु अभी वहां पहुंच चुके है।
     एक डर बना हुआ है कि कहीं वहां पर लाखों करोड़ों लोगों के एक साथ स्नान करने से और जुटने से कहीं कोविड-19 और भयंकर रुप ना लेले।
    हालांकि उत्तराखंड सरकार ने करोना की वजह से यह सूचना जारी करी है कि जो भी व्यक्ति कुंभ मेले के स्नान के लिए हरिद्वार पहुंचेगा। उसके पास कोरोनावायरस टेस्ट की नेगेटिव रिपोर्ट होनी जरूरी है। उसमें चाहे वह उत्तराखंड के लोग ही क्यों ना हो पर दोस्तों जमीनी हकीकत बिल्कुल अलग है।
    लोग बेपरवाह है, लापरवाह है और जिस तेजी से वह कुम्भ मेले के लिए जुट रहे हैं हरिद्वार में वह एक गंभीर समस्या को लेकर आ सकता है।


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     जैसा मैंने कहा कि भारत एक भावुक देश है। यहां पर लोग अपनी तार्किक क्षमता को कम इस्तेमाल करते हैं और भावनाओं के आधार पर ज्यादा चलते हैं क्योंकि यह सभी शास्त्रों मे बताई हुई बातें हैं। धर्म, भगवान लोगों की भावनाओं से, आस्था से जुड़ी हुई है। इसलिए लोग तर्क का इस्तेमाल इसमें नहीं करते हैं। जो लोग तर्क का इस्तेमाल करना चाहते हैं उन्हें ज्यादातर धार्मिक लोग नास्तिक कहते है।
    अभी आप ही समझिए की भावना के आधार पर अगर करोड़ों लोग कुंभ मेले में जुटते हैं तो क्या नतीजा हो सकता है। जबकि अभी तक कोई भी दवाई करोना के लिए असरदार साबित नहीं हो पा रही है पूरी तरीके से और लगभग डेढ़ लाख से ऊपर मौतें भारतवर्ष में हो चुकी है।
     दोस्तों अगर यह विषय आपको अच्छा लगा हो तो आप मुझे कमेंट करके बताना और मेरा एक सुझाव है आपके लिए की भीड़भाड़ वाले इलाके से बचे, मास्क लगाएं, सैनिटाइज का इस्तेमाल करें, हाथ धोते रहें और करोना को हल्के में ना लें जब तक इसका पूर्ण तरीके से इलाज नहीं आ जाता।
     जिंदा रहेंगे, स्वस्थ रहेंगे तो धर्म को लंबे समय तक हम मान सकते हैं। अगर जिंदा नहीं रहेंगे तो हम 3 साल बाद अगले कुंभ में कैसे स्नान करेगें। 
ब्लॉक पढ़ने के लिए धन्यवाद।
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राकेश शर्मा

 


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One response to “Kumbh Mela 2021 कुम्भ के बारे मे जाने कुछ महत्वपूर्ण बातें जो आपको नहीं थी पता”

  1. Nice description. Very well described.

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